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कालूराम ओलखा

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रायफलमैन
कालूराम ओलखा
चित्र:Rfn Kaluram.jpg
जन्म 09 जनवरी1946
इंद्रपुरा झुंझुनूं राजस्थान
देहांत 10 सितंबर1965
जम्मू कश्मीर
उपाधि रायफल मैन
दस्ता राजपुताना रायफ़ल
युद्ध/झड़पें भारत पाक युद्ध 1965

कालूराम ओलखा (09 जनवरी 1945 - 10 सितंबर 1965) भारतीय सेना में रायफल मैन थे जिन्होंने भारत-पाक युद्ध1965 में अभूतपूर्व वीरता का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की।

प्रारंभिक जीवन[सम्पादन]

इंद्रपुरा निवासी हरदेवा राम और नारायणी देवी के घर 9 जनवरी 1945 को दो बेटियों ओर चार बेटो के बाद कालूराम का जन्म हुआ। माता नारायणी के कहने पर नाम कालूराम रखा।गाँव की प्रथमिक स्कुल में दाखिल करवाया गया। गांव के पास सेना छावनी होने से सेना के अनुशासन को देख और पिता से देश प्रेम की कहानियां सुनने पर कालूराम ने स्कूल के समय से ही देश प्रेम प्रबल हो उठा। स्कूल में कालूराम शिक्षा के क्षेत्र में ही अव्वल नहीं थे, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का भी जज़्बा था।

सैन्य जीवन[सम्पादन]

स्कूली पढ़ाई बीच मे छोड़ कालूराम दिसंबर 1963 में भारतीय सेना में भर्ती हो गए उनको जम्मू के सोपोर नामक स्थान पर सेना की चार्ली कंपनी में रायफल मैन के पद पर नियुक्ति मिली। उन्होंने 1962 में ट्रेनिंग के साथ कई प्रशिक्षण भी लिए। पहली जून 1965 को उनकी टुकड़ी को भारत-पाक युद्ध में भेजा गया।

1965 भारत पाक युद्ध[सम्पादन]

वीर जवान अमर शहीद कालूराम ओलखा को 10 सितम्बर 1965 भारत पाक युद्ध में 4 राजपूताना राइफल्स जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर में शत्रुओं द्वारा अधिकृत एक जगह पर आक्रमण कर उस पर कब्ज़ा करने का काम सौंपा गया। हमले के दौरान उन पर एम एम जी से भारी गोलीबारी की गई और हथगोले फेंके गए। उनकी टुकड़ी के आधे से अधिक सैनिक मारे गए या घायल हो गए। कालूराम ने अपने बचे हुए जवानों को लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और घायल होने के बावजूद दुश्मन के एम एम जी युक्त दो बंकरों को बर्बाद दिया । लड़ाई के बाद इनकी गोलियां खत्म हो गई। कालूराम ने कारतूस नहीं होने के बाद भी राइफल के बट से कई दुश्मन सैनिकों को ढेर कर दिया। जब दुश्मनों ने उन पर एक और हथगोला फेंका तो उससे कालूराम गम्भीर रूप से घायल हो गए वे लहुलुहान चेहरे के साथ रेंगते हुए आगे बढ़े और अंतिम सांस लेने से पहले उन्होंने दुश्मन के अंतिम ठिकाने को नष्ट कर दिया। उन्होंने उत्कृष्ट वीरता तथा अदम्य शौर्य का प्रदर्शन किया


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