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पेठ का कोली विद्रोह

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1857 में, पेठ रियासत की कोली जाति के लोगों न अंग्रेजों के खिलाफ भयंकर विद्रोह किया। 6 दिसंबर 1857 को दो हज़ार बागी कोलीयो न पेठ के हरसोल नगर को लुट लिया। अंग्रेजों ने मामलातदार को हरसोल नगर की जांच पड़ताल के लिए भेजा लेकिन बागी कोलीयो ने मामलातदार को ही उठा लिया और बंदी बना लिया। इसके बाद कोली पेठ रियासत में और ज्यादा आतंकी हो गए। बागी कोलीयो ने Lieutenant Glasspool और उसके 30 साथीयों को घेरकर बोहत मारा। कोली विद्रोह को देखते हुए अंग्रेजों को पेठ रियासत के कोली राजा भार्गव राव पर सक हुआ और कचेहरी में बुलाया।[१][२] पता चला कि कोली विद्रोह की योजना राजा भार्गव राव और रानी के दिवान ने 6 हफते पहले ही बनाई थी। अंग्रेजों ने राजा और 15 साथीयों को राजद्रोही घोषित करके फांसी पर लटका दिया। इसके बाद बागी कोलीयो ने कचहरी पर हमला कर दिया और अंग्रेजी पुलिस वालों को मार डाला और हथियार लेकर खजाने पर हमला कर दिया। और फिर गांवों पर हमला कर दिया। इसके बाद कोली स्वर्गीय राजा के समारोह में गए और एक-एक करके अपना परिचय दिया। शाम को पता चला कि अंग्रेजों ने हार मानकर अंग्रेजी सेना वापस बुला ली है तो बागी कोलीयो न मामलातदार और अंग्रेजी पुलिस वालों को रिहा कर दिया। कुछ दिन बाद Lieutenant Glasspool फिर से अंग्रेजी सेना लेकर बागी कोलीयो के खिलाफ आया। लेकिन उसकी कोलीयो पर हमला करने की हिम्मत नहीं पड रही थी। इसी दोरान Captain Nuttal टरिंबक से सेना लेकर आया और Lieutenant Glasspool के साथ मिल गया। सेना काफी ताकतवर हो गई और बागी कोली पिछे हट गए । लेकिन कुछ दिन बाद बागी कोलीयो ने Lieutenant Glasspool और Captain Nuttal की फोज के साथ आमने-सामने की लड़ाई कर दी लेकिन हार गए और धर्मपुर रियासत में चले गए। धर्मपुर के राजा ने बागी कोलीयो को पकड़कर अंग्रेजों के हवाले कर दिया और अंग्रेजों ने सभी बागी कोलीयो को फांसी पर लटका दिया।[३][४]

सन्दर्भ[सम्पादन]

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