Welcome to EverybodyWiki ! Sign in or create an account to improve, watchlist or create an article, a company page or a bio (yours ?)...


ब्रिटेन का प्रवासी हिंदी साहित्य

EverybodyWiki Bios & Wiki से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

साँचा:Category handler

पिछले एक दशक में युनाइटेड किंगडम में हिन्दी साहित्य में सृजन का विस्फोट हुआ है तो वह है। कविता, कहानी, उपन्यास, लेख, रेडियो नाटक सभी विधाओं में प्रवासी साहित्य की रचना इंग्लैण्ड में हुई है। इसी काल में यहां लंदन में विश्व हिन्दी सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन एवं यूरोपीय हिन्दी सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।

विभिन्न संस्थाओं का योगदान[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

एक लम्बे अर्से से हिन्दी की बहुत सी संस्थाएं युनाइटेड किंगडम में रचनात्मक कार्य करने में जुटी हैं। लंदन में यू॰के॰ हिन्दी समिति, एवं कथा (यू॰के॰), बर्मिंघम में गीतांजलि बहुभाषी समुदाय एवं कृति (यू॰के॰), मैन्चेस्टर में हिन्दी भाषा समिति, यॉर्क में भारतीय भाषा संगम एवं नॉटिंघम में गीतांजलि. ये संस्थाएं देश भर में ये प्रमुख कार्य करती हैं-

  • हिन्दी की परीक्षाएं आयोजित करती हैं,
  • `पुरवाई' नाम की पत्रिका प्रकाशित करती हैं,
  • अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों का आयोजन करती हैं,
  • अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कवि सम्मेलन देश के भिन्न शहरों में किये जाते हैं,
  • कहानी कार्यशाला, कथा गोष्ठियां एवं काव्य गोष्ठियां निरंतर चलती रहती हैं।

पुरस्कृत साहित्यकार[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

श्री नरेश भारतीय, डॉ॰ पद्मेश गुप्त, तितिक्षा शाह, उषा राजे सक्सेना, डॉ॰ महेन्द्र वर्मा, उषा वर्मा, शैल अग्रवाल, एवं डॉ॰ कृष्ण कुमार, डॉ॰वंदना मुकेश आदि को हिन्दी भाषा एवं हिन्दी साहित्य की सेवाओं के लिए भारत से विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। यानी कि बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी गूंज कानों को प्रिय लगती है।

भारतीय उच्चायोग की भूमिका[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

भारतीय उच्चायोग की भी ब्रिटेन में हिन्दी साहित्य के प्रचार-प्रसार में एक विशेष भूमिका रही है। डॉ॰ लक्ष्मीमल सिंघवी जब उच्चायुक्त थे तभी यह काम शुरू हुआ था। उन्होंने हिन्दी संस्थाओं एवं कवि सम्मेलनों के विकास में सक्रिय सहयोग दिया। उनके सचिव सुरेन्द्र अरोड़ा स्वयं एक प्रतिष्ठित कहानीकार थे। श्री नरेश्वर दयाल के कार्यकाल में भी हिन्दी की गतिविधियां भारतीय उच्चायोग से सहयोग पाती रहीं। हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी अनिल शर्मा ने अपने कार्यकाल में हिन्दी भाषा के प्रचार प्रसार के लिये एक बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई। उनके उत्तराधिकारी श्री राकेश दुबे ने इस काम को नये आयाम प्रदान किये हैं। भारतीय उच्चायोग के पूर्व मंत्री समन्वय श्री पी. सी. हलदर की सक्रिय भूमिका ने तो हिन्दी एवं हिन्दी से जुड़े सभी लेखकों एवं संस्थाओं लिए भारतीय उच्चायोग के द्वार खोल दिए थे वहीं वर्तमान मंत्री समन्वय श्री रजत बाग़ची ने अपनेपन एवं रचनात्मक रिश्तों को एक नई परिभाषा दी है।

स्रोत्र[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

  • लंदन से तेजेन्द्र शर्मा का लेख उनकी अनुमति से प्रस्तुत

इन्हें भी देखें[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[सम्पादन | स्रोत सम्पादित करें]

This article "ब्रिटेन का प्रवासी हिंदी साहित्य" is from Wikipedia. The list of its authors can be seen in its historical and/or its subpage ब्रिटेन का प्रवासी हिंदी साहित्य/edithistory.